॥ श्रीहरि:॥

gstlogo
हिन्दीarrowdown
हरेरामभजन (१६ माला)

हिन्दी/संस्कृत

सभी रसायन हम करी, नहीं नाम सम कोय। रंचक घटमें संचरे, सब तन कंचन होय॥ जब ही नाम हृदय धर्यो, भयो पापको नास। मानौ चिनगी अग्निकी, परी पुराने घास॥ जागनसे सोवन भला, जो कोइ जाने सोय। अन्तर लव लागी रहै, सहजे सुमिरन होय॥ लेनेको हरि नाम है, देनेको अन्न दान। तरनेको आधीनता, डूबनको अभिमान॥ कबिरा सब जग निर्धना, धनवन्ता नहिं कोय। धनवन्ता सोइ जानिये, जाहि नाम धन होय॥
  • प्रथम पृष्ठ
  • श्रीहरेरामभजन
  • भजन
  • माला
  • अंतिम पृष्ठ

सम्बंधित ई-पुस्तकें

श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् (नामावली सहित)

श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् (नामावल...

रामरक्षास्तोत्रम्

रामरक्षास्तोत्रम्

आदित्यहृदयस्तोत्रम्

आदित्यहृदयस्तोत्रम्

नित्यस्तुति:

नित्यस्तुति:

गजेन्द्रमोक्ष

गजेन्द्रमोक्ष