इस छोटी-सी पुस्तिकामें गुरु तथा माता-पिताके भक्त कुछ बालक-बालिकाओंका संक्षिप्त परिचय दिया गया है। गुरु तथा माता-पिताकी सेवा-भक्ति भारतीय संस्कृतिका तो प्रधान अङ्ग है ही, विदेशोंमें भी इसको बहुत उत्तम गुण माना गया है। इस पुस्तिकामें ऐसे बालकोंके त्याग, आत्मबलिदान तथा सेवाकी पवित्र भावनाएँ भरी हैं। आशा है, इनसे हमारे बालक तथा उनके अभिभावक भी लाभ उठावेंगे।