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॥ श्रीहरि:॥
हिन्दी
ई – पुस्तकें
होम
/ ई – पुस्तकें
/ गीता प्रबोधनी
गीता प्रबोधनी
लेखक
श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज
भाषा
हिन्दी/संस्कृत
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अथ प्रथमोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-४-६)
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-८)
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(श्लोक-९)
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(श्लोक-११)
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(श्लोक-१२)
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(श्लोक-१३)
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(श्लोक-१४)
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(श्लोक-१७)
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(श्लोक-२१)
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(श्लोक-२२)
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(श्लोक-२३)
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(श्लोक-२४)
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(श्लोक-२५)
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(श्लोक-२६)
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(श्लोक-२७)
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(श्लोक-२८)
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(श्लोक-२९)
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(श्लोक-३१)
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(श्लोक-३२)
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(श्लोक-४४)
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(श्लोक-४५)
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(श्लोक-४६)
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(श्लोक-४७)
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अथ द्वितीयोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-४)
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(श्लोक-५)
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(श्लोक-६)
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-८)
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(श्लोक-९)
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(श्लोक-१०)
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(श्लोक-११)
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(श्लोक-२०)
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(श्लोक-२३)
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(श्लोक-२४)
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(श्लोक-२५)
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(श्लोक-२६)
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(श्लोक-४४)
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(श्लोक-२१)
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(श्लोक-२५)
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(श्लोक-२९)
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(श्लोक-३०)
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(श्लोक-३१)
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(श्लोक-३२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-२)
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अथ षष्ठोऽध्याय:
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अथ सप्तमोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-६)
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अथाष्टमोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-४)
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-९)
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(श्लोक-१०)
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(श्लोक-१३)
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(श्लोक-२२)
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(श्लोक-२८)
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अथ नवमोऽध्याय:
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-४)
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-८)
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(श्लोक-९)
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(श्लोक-१०)
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(श्लोक-१२)
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(श्लोक-१३)
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(श्लोक-२१)
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(श्लोक-२२)
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(श्लोक-२५)
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(श्लोक-२६)
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(श्लोक-२७)
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(श्लोक-२८)
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(श्लोक-३०)
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(श्लोक-३१)
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अथ दशमोऽध्याय:
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-३४)
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(श्लोक-३५)
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(श्लोक-३६)
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(श्लोक-३७)
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(श्लोक-३८)
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(श्लोक-४१)
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अथैकादशोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-४)
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(श्लोक-५)
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(श्लोक-६)
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-९)
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(श्लोक-१०)
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(श्लोक-११)
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(श्लोक-१२)
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(श्लोक-१५)
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(श्लोक-१८)
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(श्लोक-२१)
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(श्लोक-२२)
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(श्लोक-२३)
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(श्लोक-२४)
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(श्लोक-२५)
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(श्लोक-२६)
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(श्लोक-२७)
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(श्लोक-३१)
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(श्लोक-३२)
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(श्लोक-३३)
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(श्लोक-३४)
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(श्लोक-३५)
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(श्लोक-३६)
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(श्लोक-३७)
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(श्लोक-३८)
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(श्लोक-३९)
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(श्लोक-४२)
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(श्लोक-४८)
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(श्लोक-४९)
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(श्लोक-५०)
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(श्लोक-५१)
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(श्लोक-५२)
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(श्लोक-५३)
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(श्लोक-५४)
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(श्लोक-५५)
+
अथ द्वादशोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-४)
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(श्लोक-५)
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(श्लोक-६)
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-८)
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(श्लोक-९)
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(श्लोक-१०)
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(श्लोक-२०)
+
अथ त्रयोदशोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-४)
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(श्लोक-५)
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(श्लोक-६)
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-८)
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(श्लोक-९)
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(श्लोक-१०)
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(श्लोक-११)
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(श्लोक-१२)
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(श्लोक-१३)
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(श्लोक-१४)
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(श्लोक-१५)
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(श्लोक-१६)
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(श्लोक-१७)
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(श्लोक-१८)
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(श्लोक-१९)
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(श्लोक-२०)
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(श्लोक-२१)
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(श्लोक-२२)
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(श्लोक-२३)
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(श्लोक-२४)
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(श्लोक-२८)
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(श्लोक-३३)
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(श्लोक-३४)
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अथ चतुर्दशोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-४)
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(श्लोक-५)
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(श्लोक-६)
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-८)
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(श्लोक-९)
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(श्लोक-१०)
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(श्लोक-११)
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(श्लोक-१२)
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(श्लोक-१३)
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(श्लोक-१६)
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(श्लोक-२६)
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अथ पञ्चदशोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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अथ षोडशोऽध्याय:
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-१४)
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(श्लोक-१५)
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(श्लोक-१६)
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(श्लोक-१७)
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(श्लोक-१८)
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(श्लोक-१९)
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(श्लोक-२०)
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(श्लोक-२१)
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(श्लोक-२२)
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(श्लोक-२३)
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अथ सप्तदशोऽध्याय:
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(श्लोक-१)
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(श्लोक-२)
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(श्लोक-३)
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(श्लोक-४)
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(श्लोक-५)
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(श्लोक-६)
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(श्लोक-७)
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(श्लोक-८)
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(श्लोक-९)
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(श्लोक-१०)
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(श्लोक-११)
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अंतिम पृष्ठ
सम्बंधित ई-पुस्तकें
सत्संग की विलक्षणता
जीवनोपयोगी कल्याण मार्ग
यह विकास है या विनाश ? जरा सोचिये
मातृशक्ति का घोर अपमान
गीता सुधातरङ्गिणी
श्रीमद्भगवद्गीता (मूल)
श्रीमद्भगवद्गीता पदच्छेद
श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी
श्रीमद्भगवद्गीता तत्त्वविवेचनी
श्रीमद्भगवद्गीता (हिन्दी अर्थ सहित)
श्रीमद्भगवद्गीता (माहात्म्य हिंदी-...
गीता चिन्तन
कल्याणकारी प्रवचन
गृहस्थमें कैसे रहें ?
साधन सुधा सिन्धु
गीता ज्ञान प्रवेशिका
गीता माधुर्य
श्रीमद्भगवद्गीता सुगम पाठ
क्या गुरु बिना मुक्ति नहीं ?
सार संग्रह
साधन सुधा निधि
नाम जप की महिमा
श्रीमद्भगवद्गीता माहात्म्य की कहानि...
श्रीमद्भगवद्गीता शांकरभाष्य
गीता दर्पण
श्रीकृष्ण विज्ञान
गीता संग्रह
श्रीज्ञानेश्वरी (हिन्दी-भावानुवाद)
शिखा (चोटी) धारणकी आवश्यकता
मानस में नाम-वन्दना
प्रश्नोत्तर मणिमाला
मानवमात्र के कल्याण के लिये
भगवन्नाम
श्रीमद्भगवद्गीता श्रीरामानुज भाष्य
शरणागति
सत्संग के अमृत कण
मेरे तो गिरधर गोपाल
एक संत की वसीयत
सहज साधना
कर्म रहस्य
अच्छे बनो
प्रेरक कहानियाँ
मूर्ति पूजा
कल्याण पथ
आदर्श कहानियाँ
सागर के मोती
वासुदेव: सर्वम्
जीवनोपयोगी प्रवचन
तात्त्विक प्रवचन
सब साधनों का सार
भगवत्तत्त्व
अमृत बिन्दु
परम पिता से प्रार्थना
सच्चा गुरु कौन ?
तत्त्वज्ञान कैसे हो?
दुर्गति से बचो
महापाप से बचो
जीवन का सत्य
एकै साधै सब सधै
जीवन का कर्तव्य
सत्य की खोज
भगवान् और उनकी भक्ति
भगवत्प्राप्ति सहज है
ज्ञान के दीप जले
आवश्यक शिक्षा
हम ईश्वर को क्यों मानें?
नित्ययोग की प्राप्ति
भगवान् से अपनापन
साधन और साध्य
गीता माधुर्यम्
पाण्डवगीता
हंसगीता
संसार का असर कैसे छूटे ?
तू ही तू
वास्तविक सुख
किसान और गाय
सत्संग के फूल
संत समागम
जित देखूँ तित तू
साधकों के प्रति
स्वाधीन कैसे बनें ?
एक नयी बात
सुन्दर समाज का निर्माण
सर्वोच्च पद की प्राप्ति का साधन
भगवत्प्राप्ति की सुगमता
सत्संग का प्रसाद
जिन खोजा तिन पाइया
देश की वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम
सत्संग मुक्ताहार
अमरता की ओर
सब जग ईश्वररूप है
सत्संग की विलक्षणता
जीवनोपयोगी कल्याण मार्ग
यह विकास है या विनाश ? जरा सोचिये
मातृशक्ति का घोर अपमान
गीता सुधातरङ्गिणी
श्रीमद्भगवद्गीता (मूल)
श्रीमद्भगवद्गीता पदच्छेद
श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी
श्रीमद्भगवद्गीता तत्त्वविवेचनी
श्रीमद्भगवद्गीता (हिन्दी अर्थ सहित)
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गीता चिन्तन
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सत्संग की विलक्षणता
जीवनोपयोगी कल्याण मार्ग
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