॥ श्रीहरि:॥

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गयाश्राद्धपद्धति

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • भगवान् आदिगदाधरकी स्तुति
  • +
    गया-माहात्म्य
    • (१) गयामें पिण्डदान करनेसे पुत्रकी प्राप्ति तथा पितरोंका उद्धार
    • (२) गयाश्राद्धसे प्रेतयोनिसे मुक्ति
    • (३) गयाके नामकरणमें गयासुरकी कथा
    • (४) गयाके पुण्यप्रद स्थान
  • गयाश्राद्धका काल
  • +
    गयायात्रासम्बन्धी जाननेयोग्य आवश्यक बातें
    • [१] पितरोंकी प्रसन्नतासे श्राद्धकर्ताका परम कल्याण
    • [२] यात्राकी सम्पन्नता
    • [३] भ्रम-निवारण
    • [४] पादगया, नाभिगया तथा कपालगयाकी यात्राका क्रम
  • +
    प्रमाण-संग्रह
    • (१) तीर्थप्राप्तिनिमित्तक पार्वणश्राद्धमें निषिद्ध कर्म
    • (२) तीर्थप्राप्तिनिमित्तक तीर्थश्राद्धमें निषिद्ध कर्म
    • (३) तीर्थश्राद्धमें नवदैवत्यश्राद्धकी विधि
    • (४) षड्दैवत्यश्राद्धमें पिण्डदानकी व्यवस्था
    • (५) गयायात्रांगभूतघृतश्राद्ध
    • (६) सात गोत्र तथा सात गोत्रोंके एक सौ एक कुलपुरुष
    • (७) उत्तरीय वस्त्रकी अनिवार्यता
    • (८) कच्छविहीन (लाँगसे रहित) धोतीका निषेध
    • (९) तीर्थमें श्राद्धसे पूर्व तर्पणकी करणीयता
    • (१०) ताताम्बादि पितृ-परिगणन
    • (११) तर्पणमें कुशके प्रयोगकी विधि
    • (१२) [क] श्राद्धमें लोहेके पात्रका सर्वथा निषेध
    • (१३) पिण्डका द्रव्य
    • (१४) आचमनके अनन्तर भी पवित्रीका त्याग अपेक्षित नहीं
    • (१५) दीपककी दिशा
    • (१६) नीवीबन्धन
    • (१७) श्राद्धमें पितृगायत्रीका पाठ
    • (१८) विभक्तिनिर्णय
    • (१९) स्वाहा-स्वधा कहाँ नहीं होगा?
    • (२०) एकतन्त्रका निषेध
    • (२१) श्राद्धोंमें विकिरदानकी दिशा
    • (२२) पितृकार्यमें पातितवामजानु
    • (२३) अग्नौकरण किसमें करें
    • (२४) देवपात्रालम्भन तथा पितृपात्रालम्भन
    • (२५) अंगुष्ठनिवेशन
    • (२६) मण्डलकरण
    • (२७) भोजनपात्रोंसे तिलादिका अपसारण
    • (२८) कुशास्तरणसे पूर्व अवनेजन-दानका विधान
    • (२९) पिण्ड शब्दकी नपुंसकलिंगता
    • (३०) लेपभागकी व्यवस्था
    • (३१) ऊह-विचार
    • (३२) सामान्य पिण्डदानकी विधि
    • (३३) श्राद्ध आदिके मध्यमें आनेवाले अशौचकी अप्रवृत्तिका विचार
    • (३४) कर्मोंके आरम्भपर विचार
    • (३५) पिण्ड-प्रतिपत्ति (विसर्जन)
    • (३६) विश्वेदेवों तथा पितरोंके विसर्जनका क्रम
    • (३७) दीपनिर्वापणकी प्रक्रिया
    • (३८) पितरोंकी प्रसन्नतासे श्राद्धकर्ताका परम कल्याण
  • गयाश्राद्धकी सामग्री
  • +
    गयायात्रांगभूतघृतश्राद्ध
    • घृतश्राद्धप्रयोग१
    • मण्डलकरण
  • घृतश्राद्धके अनन्तरके कृत्य एवं गयायात्राप्रारम्भ
  • +
    गयामें श्राद्धका क्रम
    • [१] गयातीर्थमें सत्रह दिनके श्राद्धस्थलोंकी तालिका
    • [२] पुन:पुनातीर्थमें श्राद्ध
    • [३] गयातीर्थमें सत्रह दिनके श्राद्धस्थलोंके कृत्य
    • [४] गयातीर्थमें सात दिनके श्राद्धस्थलोंके कृत्य
    • [५] गयातीर्थमें पाँच दिनके श्राद्धस्थलोंके कृत्य
    • [६] गयातीर्थमें तीन दिनके श्राद्धस्थलोंके कृत्य
    • [७] गयातीर्थमें एक दिनके श्राद्धस्थलोंके कृत्य
  • तीर्थप्राप्तिनिमित्तक तर्पण-प्रयोग
  • तीर्थप्राप्तिनिमित्तकपार्वणश्राद्ध
  • तीर्थप्राप्तिनिमित्तक तीर्थश्राद्ध
  • तीर्थप्राप्तिनिमित्तक पिण्डदानात्मक तीर्थश्राद्ध
  • तीर्थप्राप्तिनिमित्तक एकपिण्डदानात्मक तीर्थश्राद्ध
  • श्रीविष्णोरष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्
  • श्रीविष्णोरष्टोत्तरशतनामावलि:
  • गदाधरस्तोत्र
  • अन्तिम पृष्ठ

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