॥ श्रीहरि:॥

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दाम्पत्य जीवन का आदर्श

श्रद्धेय श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार

हिन्दी/संस्कृत

इस पुस्तकमें श्रद्धेय श्रीभाईजीद्वारा लिखित आदर्श हिंदू-विवाहका स्वरूप, उसका महत्त्व, पति-पत्नीके कर्तव्य, धर्म, व्यवहार आदि विषयके लेखों, पदों एवं पत्रों आदिका संग्रह है। इसमें पति-पत्नीके आपसी मत-भेदोंको दूर करनेके सरलतम सूत्र दिये गये हैं। दहेज, तलाक आदि जैसे महत्त्वपूर्ण विषयके लेखोंको भी इसमें सम्मिलित कर लिया गया है। श्रद्धेय श्रीभाईजीद्वारा निर्दिष्ट इन सूत्रोंके अनुसार चलनेसे दाम्पत्य-जीवन निश्चितरूपसे सुखपूर्ण एवं आदर्श हो सकता है। ये सभी सूत्र बहुत उपयोगी एवं मननीय हैं। सभीको इससे लाभ उठाना चाहिये।
  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • वन्दना
  • पूर्ण-समर्पण
  • श्रीभाईजीकी अतुल सम्पत्ति
  • श्रीभाईजीका निवेदन
  • दाम्पत्य-जीवन
  • वर-वधूका सुखमय मार्ग
  • सुखमय विवाहके साधन
  • दाम्पत्य-सुख कैसे प्राप्त हो?
  • भारतीय नर-नारीका सुखमय गृहस्थ
  • पतिके कर्तव्य
  • पतिका धर्म
  • पतिका व्यवहार
  • गृहस्थाश्रम बेड़ी नहीं है
  • पत्नीका परित्याग कदापि उचित नहीं
  • पत्नीके त्यागकी बात कभी न सोचें
  • पत्नीपर व्यर्थ संदेह मत कीजिये
  • पत्नीके अपराधको क्षमा करें
  • साध्वी पत्नीका त्याग बड़ा पाप है
  • पत्नीको मारना महापाप है
  • पत्नीका सुधार
  • पर-स्त्रीका चरणस्पर्श भी न करें
  • पत्नीसे अनुचित लाभ न उठाइये
  • पति अपना धर्म सोचे
  • पति-धर्म
  • पत्नीका धर्म
  • पत्नीका व्यवहार
  • पत्नीके कर्तव्य
  • पत्नी-धर्म
  • नारीके भूषण
  • नारीके दूषण
  • भारतीय नारीका स्वरूप और उसका दायित्व
  • नारीका गुरु पति ही है
  • स्वतन्त्र विवाह प्रेम नहीं, मोह है
  • स्वेच्छावरण हिंदू-संस्कृतिसे अवैध
  • पतिव्रता और बलात्कार
  • दुष्ट पतिको पत्नी क्या समझे
  • सती-चमत्कार
  • आत्महत्याकी बात न सोचें
  • अविवाहिता रहना उचित नहीं
  • घरसे निकलकर भागनेकी बात न सोचें
  • पतिका दुर्व्यवहार और उसका उपाय
  • पतिका दुराचार और उसका उपाय
  • स्वभाव-सुधार कैसे करें
  • विवाह-विच्छेद (तलाक) सर्वथा अनुचित
  • दहेज-प्रथा और हमारा कर्तव्य
  • नारी-निन्दाकी सार्थकता
  • सुधारके नामपर संहार
  • अन्तिम पृष्ठ

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