॥ श्रीहरि:॥

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भगवत्प्रेम प्राप्ति के उपाय

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

महापुरुषोंके प्रत्येक भाव एवं क्रियामें सम्पूर्ण प्राणियोंके हितका भाव भरा रहता है, इसीलिये श्रीगीताजीमें उन्हें ‘सर्वभूतहिते रता:’ कहा गया है। जैसे हमें संसार प्रत्यक्ष दिखायी देता है वैसे ही उन्हें यह प्रत्यक्ष दिखायी देता है कि जो भाई-बहिन अब इस मनुष्यजन्ममें भगवत्प्राप्तिके लिये चेष्टा न करके अपना समय प्रमाद तथा बुरे आचरणोंमें बिताते हैं, परलोकमें उन्हें कितना महान् कष्ट भोगना पड़ेगा। उस भावी दु:खसे हमें बचानेके लिये उनका सब तरहका प्रयास होता है। हमारी धारणामें परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका भगवान‍्से अधिकारप्राप्त पुरुष थे। उन्होंने अपने आचरणोंसे एवं समय-समयपर पारमार्थिक बातोंसे लोगोंको भगवान‍्की ओर लगानेका महान् प्रयास किया है। लगभग ६०-६५ वर्ष पहले उन्होंने जो आध्यात्मिक प्रवचन दिये थे उन्हें किसी श्रद्धालु सज्जनने लिपिबद्ध कर लिये थे। उन लिपिबद्ध प्रवचनोंका साधारण भाई-बहिनोंको आध्यात्मिक लाभ मिल जाय, इस उद्देश्यसे उन प्रवचनोंको पुस्तकका रूप दिया जा रहा है। इन प्रवचनोंमें उन्होंने अपने जीवनकी बातें तथा हम सभी लोगोंके लिये महान् उपयोगी बातें कही हैं। हमें आशा है कि आपलोग इन प्रवचनोंको पढ़कर जीवनमें लाकर विशेष लाभ लेंगे।
  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • भगवत्प्रेम-प्राप्तिके उपाय
  • शान्ति चित्तकी एकाग्रतामें है
  • भगवान् भक्तका योग-क्षेम वहन करते हैं
  • शान्ति मिलनेके उपाय
  • प्रभु-प्राप्तिके विविध उपाय
  • त्यागकी महत्ता
  • भगवान‍्में श्रद्धाकी आवश्यकता
  • सभी मार्गोंमें वैराग्यकी आवश्यकता
  • महापुरुषोंकी महिमा
  • भगवन्नामकी महिमा अपार है
  • सबसे आवश्यक काम भगवत्-प्राप्ति है
  • उत्तम बातोंके पालनसे लाभ
  • भगवान् जल्दी कैसे मिलें
  • तीर्थोंमें पालनीय बातें
  • मनमें भगवान‍्को बसा लो
  • श्रेष्ठ पुरुषोंमें समता ही सुगन्ध है
  • सत्यको ही प्राण समझे, माता-पिताकी सेवाका महत्त्व
  • सदैव भगवान‍्का साथ अनुभव करते रहो
  • भक्त सर्वत्र भगवान‍्को देखता है और उन्हींके साथ क्रीड़ा करता है
  • सदावर्त बाँटनेवाले भगवान‍्से हमारी मित्रता
  • ध्यानसहित नामका जप सोनेमें सुगन्ध है
  • उत्तराखण्ड, गंगाजीका तट, गंगारेणुकाकी महिमा
  • भगवान‍्से प्रत्यक्ष मिलनेका उपाय—श्रद्धा-विश्वास
  • वैराग्यकी महिमा
  • गृहस्थमें निष्कामकर्म
  • मन लगाकर जपकी विशेषता
  • निष्कामसेवा
  • समयका सदुपयोग भगवत्प्राप्तिमें है
  • हर समय प्रसन्न और मुग्ध रहो
  • सत्संगकी सार-सार बातें
  • सत्संगकी बहुमूल्य बातें
  • अन्तिम पृष्ठ

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