॥ श्रीहरि:॥

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भागवतरत्न प्रह्लाद

हिन्दी/संस्कृत

भक्त-जगत‍्में प्रह्लाद सर्वशिरोमणि माने जाते हैं। प्रह्लादकी भक्तिमें कहीं भी कामना, भय और मोहको स्थान नहीं है, उनकी भक्ति सर्वथा विशुद्ध, अनन्य और परम आदर्श है। उन्हीं प्रह्लादके चरित्रका दोनों विद्वान् लेखकोंने इस पुस्तकमें चित्रण किया है। आशा है भागवतरत्न प्रह्लादके आदर्श जीवनसे भारतके नर-नारी विशेष लाभ उठावेंगे।
  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • आविर्भावका समय
  • लीलाभूमि
  • वंशपरिचय
  • पूर्वजन्मकी कथा
  • हिरण्यकशिपुका वृत्तान्त
  • भ्रातृ-वध
  • भ्रातृ-वधसे व्याकुलता
  • प्रह्लाद गर्भमें
  • देवताओंका हिरण्यपुरपर आक्रमण
  • महारानी कयाधूको महर्षि नारदका महोपदेश
  • हिरण्यकशिपुको वरप्राप्ति
  • प्रह्लादका बालचरित्र
  • बालक प्रह्लादको माताकी शिक्षा
  • प्रह्लादकी दीनबन्धुता
  • प्रह्लादकी शिक्षा
  • प्रह्लादकी प्रतिभा
  • हिरण्यकशिपुका कड़ा शासन
  • प्रह्लादका पुन: गुरुकुल-वास
  • दैत्य-बालकोंसे प्रह्लादकी बातचीत
  • प्रह्लादका पुन: राजसभामें प्रवेश
  • दैत्य-बालकोंको प्रह्लादका उपदेश
  • विद्यालयमें कृत्याकी उत्पत्ति
  • भक्तवत्सल भगवान‍्का दर्शन
  • प्रह्लादका व्याख्यान
  • प्रह्लाद और देवताओंद्वारा भगवान‍्की स्तुतियाँ
  • प्रह्लादका गार्हस्थ्य-जीवन
  • दैत्यर्षि प्रह्लादका शासन
  • प्रह्लादकी तत्त्वजिज्ञासा
  • सम्राट् प्रह्लादकी न्यायप्रियता
  • प्रह्लादके समीप इन्द्रका अध्ययन
  • तपस्वी प्रह्लाद और इन्द्रका संवाद
  • दैत्यर्षि प्रह्लादका अन्तिम जीवन
  • अन्तिम पृष्ठ

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