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॥ श्रीहरि:॥
हिन्दी
ई – पुस्तकें
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/ ई – पुस्तकें
/ भागवत नवनीत
भागवत नवनीत
लेखक
सन्त श्रीरामचन्द्र केशव डोंगरे जी महाराज
भाषा
हिन्दी/संस्कृत
पुस्तक पढ़ें
विषय-सूची
•
प्रथम पृष्ठ
•
निवेदन
•
प्रस्तावना
+
श्रीमद्भागवत-माहात्म्य
•
सच्चिदानन्दस्वरूप भगवान् श्रीकृष्णका वन्दन
•
शुक-जन्मकी कथा
•
शुकदेवजीका वैराग्य और गृहत्याग
•
कथा-महिमा
+
बदरीक्षेत्रकी महिमा
•
नारद-सनकादि-संवादमें भागवत-कथाका उपक्रम
•
गोकर्णोपाख्यान
•
भागवतसप्ताहयज्ञकी विधि
+
प्रथमस्कन्ध
•
मंगल-प्रस्तावना
•
भागवतका प्रतिपाद्य—निष्काम भक्ति
•
सुदामाजीकी निष्काम-भक्ति
•
गोपियोंकी निष्काम-भक्ति
•
भगवान् विचारपूर्वक धन देते हैं
•
वैराग्यपात्रमें ही ज्ञान टिकता है
•
भक्ति करनेमें सभीका अधिकार है
•
नैमिषारण्यमें ब्रह्मसत्र
•
श्रेय और प्रेय
•
भगवान्के अवतारका प्रयोजन
•
पौराणिक मंगलाचरण और उसका तात्पर्य
•
सूतजीद्वारा भागवत-कथाका आरम्भ
•
व्यास-विषाद
•
नारद-व्यास-संवाद
•
नारदजीकी आत्मकथा
•
सन्त-तत्त्व
•
भागवतके अधिकारी वक्ता और श्रोता
•
परीक्षित्के जन्मकी कथा
•
कुन्तीकी भक्ति
•
भीष्मपितामहका महाप्रयाण
•
श्रीकृष्णकी काम-विजय
•
संसार भगवान्का नाटक है
•
विदुरजीके उपदेशसे धृतराष्ट्रका वनगमन
•
कलियुगके लक्षण देखकर युधिष्ठिरकी चिन्ता
•
भगवान्के उपकारोंका स्मरण
•
परीक्षित्को राजा बनाकर पाण्डवोंका हिमालयको प्रस्थान
•
महाराज परीक्षित् द्वारा कलियुगका दमन
•
परीक्षित्को शापकी प्राप्ति
•
परीक्षित्का अनशन व्रत और ऋषियोंका आगमन
•
सद्गुरु-महिमा
•
शुकदेवजीका आगमन
+
द्वितीय स्कन्ध
•
मनकी स्थिरताके लिये प्राणायाम आवश्यक
•
जगत् भगवान्का स्वरूप है
•
भगवत्सेवामें ही सुख
•
श्रीशुकदेवकृत मंगलाचरण
•
भगवान् मंगलमय हैं
•
जगत्की उत्पत्तिकी कथा
•
सुख-दु:खका कारण—माया
+
तृतीय स्कन्ध
•
विदुरजीका गृहत्याग
•
विदुर-दम्पतीकी दिनचर्या
•
धृतराष्ट्रका कपटपूर्ण व्यवहार
•
श्रीकृष्णके प्रति विदुर-दम्पतीका प्रेमभाव
•
सन्धिदूत श्रीकृष्ण
•
विदुरजीका भाग्य
•
आँखें भगवान्के दर्शनके लिये हैं
•
भक्ति ज्ञान-वैराग्यकी जननी है
•
भगवान् प्रेमके भूखे होते हैं
•
पुत्ररूपमें पाप-पुण्य
•
भगवान् धर्मके पक्षपाती हैं
•
रसोईघर अन्नपूर्णामाताका मन्दिर है
•
पाण्डवोंका स्वरूप
•
विदुरजीकी तीर्थयात्रा
•
यमराजके दासी-पुत्र होनेकी कथा
•
विदुर-मैत्रेय-संवाद
•
वराहावतारकी कथा
•
कपिल-अवतारकी कथा
•
कपिल-गीता
+
चतुर्थ स्कन्ध
•
तपका स्वरूप
•
क्रिया नहीं, भावशुद्धि आवश्यक
•
संसार भावमय है
•
भगवान् शिव विश्वनाथ हैं
•
भगवान् शिवकी उदारता और रावणकी दुष्टता
•
पंचदेवोपासना
•
ध्रुव-चरित्र
•
सम्बन्ध जीवके साथ नहीं, ईश्वरके साथ रखो
•
राजा अंग, वेन और पृथुकी कथा
•
अन्न ब्रह्म है
•
भोजन यज्ञ है
•
महाराज पृथुका यज्ञ
•
प्रचेताओंकी कथा
+
पंचम स्कन्ध
•
जड़भरत-चरित्र
•
अन्त मति सो गति
•
राजा रहूगणको उपदेश
+
षष्ठ स्कन्ध
•
भगवन्नामका जप करो
•
रामसे बड़ा रामका नाम
•
अजामिलोपाख्यान
•
नारायण-कवच
•
इन्द्रद्वारा विश्वरूपका वध
•
वृत्रासुरकी उत्पत्ति
•
वृत्रासुरके पूर्वजन्मकी कथा
+
सप्तम स्कन्ध
•
भगवान् सर्वव्यापक हैं
•
शिशुपाल और दन्तवक्त्र
•
हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु
•
प्रह्लाद-चरित
•
भक्तिके लिये धन और ज्ञान नहीं, प्रेम चाहिये
•
दु:खमें भी भगवान्का उपकार मानो
•
प्रह्लादद्वारा नरसिंहभगवान्की स्तुति
•
भगवान् धन नहीं, प्रेम चाहते हैं
•
चमत्कारको नमस्कार करना ठीक नहीं
•
भगवान्को अर्पण करके ही भोजन करना चाहिये
•
शास्त्रोंमें विश्वास रखो
•
परमात्माकी प्रसन्नताके दो साधन—सेवा और स्मरण
•
पुत्रके पाप-पुण्यसे माता-पिताकी दुर्गति-सद्गति
•
युधिष्ठिरकी चिन्ता और नारदजीका समाधान
•
संत सदा सत्य बोलते हैं
•
सरलहृदयको ही भगवान्का दर्शन होता है
+
अष्टम स्कन्ध
•
मन्वन्तर-वर्णन
•
गजेन्द्र-मोक्षकी कथा
•
समुद्र-मन्थनकी कथा
•
लक्ष्मी कहाँ रहती हैं?
•
भगवान्का धन्वन्तरि-अवतार
•
भगवान् मोहिनी-नारायण
•
मनपर विश्वास रखना ठीक नहीं
•
शिवजीको मोहिनी-नारायणके दर्शन
•
वामन-अवतारकी कथा
•
गृहस्थके धर्म
•
ब्रह्मचारीके धर्म
•
राजा बलिकी यज्ञशालामें वामनभगवान्का आगमन
•
वामनभगवान्का बलिके पूर्वजोंकी प्रशंसा करना
•
वामनभगवान्का तीन पग पृथ्वी माँगना
•
शुक्राचार्यका बलिको दान देनेसे मना करना
•
बलिका दान देनेके लिये उद्यत होना
•
वामनभगवान्का विराट्रूप धारण करना
•
विन्ध्यावलीद्वारा भगवान्की स्तुति
•
भगवान्द्वारा बलिका द्वारपाल बनना
•
लक्ष्मीजीका बलिके यहाँ आना और उनकी धर्मबहन बनना
•
लक्ष्मीजीका बलिके बन्धनसे नारायणको छुड़ाना
+
नवम स्कन्ध
•
मर्यादापुरुषोत्तम और लीलापुरुषोत्तम
•
सूर्यवंश-प्रकरण
•
राजा अम्बरीषकी कथा
•
गंगावतरणकी कथा
•
श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान्के जन्मकी कथा
•
‘अयोध्या’ और ‘दशरथ’ का तात्पर्यार्थ
•
दशरथजीका स्वप्न
•
भगवान् शंकरका अयोध्या-आगमन
•
भगवान् श्रीरामका चतुर्भुज नारायणरूपमें प्राकट्य
•
कौसल्याजीका भगवान्से शिशुरूप धारण करनेका अनुरोध
•
श्रीरामजन्मका उत्सव
•
श्रीराम-चरित्र-चिन्तन
•
श्रीकृष्ण-चरित्र-चिन्तन
•
श्रीरामकी सरलता
•
सीता-वनवास
•
श्रीरामका जगत्की प्रत्येक स्त्रीमें मातृभाव
•
लव-कुशद्वारा श्रीराम-कथाका गायन
•
रामायण श्रीसीताजीका महान् चरित है
•
श्रीराम-लीला और श्रीकृष्ण-लीला
•
विश्वामित्रजीका अयोध्या-आगमन
•
विश्वामित्रजीका यज्ञरक्षार्थ राम-लक्ष्मणको माँगना
•
श्रीराम-लक्ष्मणद्वारा यज्ञरक्षा
•
अहल्या-उद्धार
•
राजा जनकको राम-लक्ष्मणके रूपमें परब्रह्म परमात्माके दर्शन
•
श्रीराम-लक्ष्मणकी गुरुसेवा
•
तुलसीजीकी कथा
•
श्रीसीताजीद्वारा गौरी-पूजन
•
राम-लक्ष्मणका स्वयंवर-मण्डपमें आगमन
•
रावणका गर्व-भंग
•
श्रीरामद्वारा शिवधनुष-भंग
•
रामायणके विभिन्न काण्डोंका तात्पर्यार्थ
•
संक्षिप्त राम-कथा
•
चन्द्रवंश-प्रकरण
•
भरत-वंशकी कथा
•
जनमेजयका नागयज्ञ
•
यदुवंशकी कथा
•
कृष्ण-कथा प्रेमरसकी कथा है
+
दशम स्कन्ध
•
परीक्षित् द्वारा शुकदेवजीसे कृष्ण-कथा सुनानेकी प्रार्थना
•
ब्रह्मादिक देवताओंकी अवतारहेतु प्रार्थना और भगवान्का आश्वासन
•
वसुदेव-देवकीका विवाह
•
कंसवध-सम्बन्धी आकाशवाणी
•
कंसद्वारा देवकीके छ: बालकोंकी हत्या
•
बलरामजीका प्राकट्य
•
गर्भ-स्तुति
•
भगवान् श्रीकृष्णका प्राकट्य
•
वसुदेवजीका बालकृष्णको लेकर गोकुल जाना और योगमायारूपी कन्याको लेकर वापस आना
•
नन्द-महोत्सव
•
मानसी-सेवा
•
संसार दु:खमय और परमात्मा आनन्दमय
•
प्रभुप्राप्तिके दो मार्ग—ज्ञानमार्ग और कर्ममार्ग
•
जन्माष्टमी और रामनवमीका तात्पर्य
•
भगवान्को पैसेकी नहीं, भक्तिकी जरूरत
•
भगवान् शंकरका बालकृष्णके दर्शनके लिये आना
•
नन्दबाबाका कंसको भेंट देने मथुरा जाना
•
नन्द-वसुदेव-मिलन
•
पूतना-उद्धार
•
गोपियोंका कृष्ण-प्रेम
•
शकटासुर-वध
•
गर्गाचार्यजीपर बालकृष्णकी कृपा
•
सुखिया मालन
•
जीव ईश्वरका अंश है
•
मनसे ही मुक्ति और मनसे ही बन्धन है
•
श्रीकृष्णका वंशी-वादन
•
माखन-चोरी-लीला
•
क्रममुक्ति और सद्योमुक्ति
•
गोपियोंका कृष्ण-प्रेम
•
बालकृष्णका प्रभावती गोपीको छकाना
•
ऊखल-बन्धन
•
नलकूबर-मणिग्रीवका उद्धार
•
अघासुर-उद्धार
•
रासलीलाका तात्पर्य
•
श्रीकृष्णकी भोजनलीला
•
ब्रह्माजीका मोह
•
ब्रह्माजीद्वारा भगवान् बालकृष्णकी स्तुति
•
प्रेमतत्त्व
•
गोचारणलीला
•
धेनुकासुर-वध
•
कालिय-मर्दन
•
इन्द्रिय-वासना ही विष है
•
वेणुगीत
•
गोवर्धन-लीला
•
रासलीला
•
मदन-मान-भंग-लीला
•
नारदजीका कंसको कृष्णके वसुदेवपुत्र होनेकी बात बताना
•
कंसद्वारा धनुषयज्ञका आयोजन
•
कंसका अक्रूरको कृष्ण-बलरामको लानेके लिये गोकुल भेजना
•
मृत्यु अवश्यम्भावी है—एक दृष्टान्त
•
अक्रूरजीकी कृष्ण-दर्शनकी उत्सुकता
•
अक्रूरजीको भगवान्के चरण-चिह्नोंके दर्शन
•
भक्तिसे मरण सुधरता है
•
अक्रूरजीको कृष्ण-बलरामके दर्शन
•
कृष्ण-बलरामकी मथुरा जानेकी तैयारी
•
श्रीकृष्णका मातृप्रेम
•
श्रीकृष्ण और राधा—एक तत्त्व
•
श्रीकृष्ण-बलरामका मथुराके लिये प्रस्थान
•
कृष्ण-बलरामका मथुरा-भ्रमण
•
कंसके धोबीका वध
•
दर्जी, माली और कुब्जापर कृपा
•
धनुष-भंग
•
कुवलयापीड और कंसके पहलवानोंका वध
•
कंस-वध
•
जीव-ईश्वर-सम्बन्ध
•
भगवान् ही पिता हैं, भगवान् ही माता हैं
•
भगवान्से कोई-न-कोई नाता जोड़ो
•
कंस-वधका उद्देश्य—राज्यग्रहण नहीं, प्रजारक्षण
•
नन्दबाबाकी विदाई
•
श्रीकृष्ण-बलरामका गुरुकुलमें विद्याध्ययन
•
सुदामासे मित्रता
•
भगवान् श्रीकृष्णका गुरुदक्षिणामें गुरुके मरे पुत्रको यमलोकसे लाना
•
उद्धवका व्रजगमन
•
अक्रूरको हस्तिनापुर भेजना
•
जरासंधका मथुरापर आक्रमण
•
द्वारकापुरीका निर्माण
•
कालयवन-वध
•
मुचुकुन्दपर कृपा
•
रुक्मिणी-मंगल
•
रुक्मिणीजीके विवाहकी कथाका तात्पर्यार्थ
•
रुक्मिणी-हरण
•
श्रीकृष्णका युद्ध करने आये रुक्मीको रथमें बाँध लेना
•
बलरामजीका रुक्मीको छुड़ाना
•
श्रीकृष्णका उद्धवजीको नन्दबाबा और यशोदामैयाके पास गोकुल भेजना
•
श्रीकृष्ण-बलरामका वृन्दावन आना
•
गृहस्थाश्रमी श्रीकृष्ण
•
अष्टधा प्रकृति ही आठ पटरानियाँ हैं
•
सोलह हजार राजकन्याओंका तात्पर्यार्थ
•
सोलह हजार राजकन्याओंसे श्रीकृष्णके विवाहका कारण
•
श्रीकृष्ण-बाणासुर-युद्धकी कथा
•
नारदजीको श्रीकृष्णके गृहस्थाश्रमका दर्शन
•
भगवान् श्रीकृष्णकी दिनचर्या
•
युधिष्ठिरद्वारा राजसूय यज्ञका आयोजन और उसमें श्रीकृष्णकी प्रथम पूजा
•
शिशुपाल-उद्धार
•
महाभारत-युद्धकी पृष्ठभूमि
•
सुदामा-मिलन
•
भगवान्का जीवके साथ नि:स्वार्थ प्रेम
•
श्रीकृष्णका कुरुक्षेत्रमें व्रजवासियोंसे मिलन
•
ग्रहण-स्नानकी महिमा
•
कंसद्वारा मारे गये छ: देवकीपुत्रोंको लाना
•
वेद-स्तुति
•
दशम स्कन्ध—निरोध-लीला
+
एकादश स्कन्ध
•
मुक्ति-लीला
•
यदुवंशके नष्ट होनेका शाप
•
वसुदेवजीको नारदजीका उपदेश
•
कृष्ण-उद्धव-संवाद
•
दत्तात्रेयजीका राजा यदुको उपदेश
•
भगवान् श्रीकृष्णका उद्धवजीको हंस-गीताका उपदेश
•
सबसे बड़ा दान और सबसे बड़ा तप
•
ज्ञानी और मूर्ख
•
स्वर्ग-नरक तथा जीव और ईश्वर
•
दुखी और सुखी
•
भगवान्का उद्धवजीको अपनी चरण-पादुकाएँ देना
•
भक्त पुण्डरीककी कथा
•
द्वादश स्कन्ध
•
अंतिम पृष्ठ
सम्बंधित ई-पुस्तकें
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