॥ श्रीहरि:॥

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भागवत नवनीत

सन्त श्रीरामचन्द्र केशव डोंगरे जी महाराज

हिन्दी/संस्कृत

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    श्रीमद्भागवत-माहात्म्य
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    • कलियुगके लक्षण देखकर युधिष्ठिरकी चिन्ता
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    द्वितीय स्कन्ध
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    • सुख-दु:खका कारण—माया
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    • कपिल-गीता
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    चतुर्थ स्कन्ध
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    • क्रिया नहीं, भावशुद्धि आवश्यक
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    • भगवान‍्को अर्पण करके ही भोजन करना चाहिये
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    • सरलहृदयको ही भगवान‍्का दर्शन होता है
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    • लक्ष्मीजीका बलिके बन्धनसे नारायणको छुड़ाना
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    • मुचुकुन्दपर कृपा
    • रुक्मिणी-मंगल
    • रुक्मिणीजीके विवाहकी कथाका तात्पर्यार्थ
    • रुक्मिणी-हरण
    • श्रीकृष्णका युद्ध करने आये रुक्मीको रथमें बाँध लेना
    • बलरामजीका रुक्मीको छुड़ाना
    • श्रीकृष्णका उद्धवजीको नन्दबाबा और यशोदामैयाके पास गोकुल भेजना
    • श्रीकृष्ण-बलरामका वृन्दावन आना
    • गृहस्थाश्रमी श्रीकृष्ण
    • अष्टधा प्रकृति ही आठ पटरानियाँ हैं
    • सोलह हजार राजकन्याओंका तात्पर्यार्थ
    • सोलह हजार राजकन्याओंसे श्रीकृष्णके विवाहका कारण
    • श्रीकृष्ण-बाणासुर-युद्धकी कथा
    • नारदजीको श्रीकृष्णके गृहस्थाश्रमका दर्शन
    • भगवान‍् श्रीकृष्णकी दिनचर्या
    • युधिष्ठिरद्वारा राजसूय यज्ञका आयोजन और उसमें श्रीकृष्णकी प्रथम पूजा
    • शिशुपाल-उद्धार
    • महाभारत-युद्धकी पृष्ठभूमि
    • सुदामा-मिलन
    • भगवान‍्का जीवके साथ नि:स्वार्थ प्रेम
    • श्रीकृष्णका कुरुक्षेत्रमें व्रजवासियोंसे मिलन
    • ग्रहण-स्नानकी महिमा
    • कंसद्वारा मारे गये छ: देवकीपुत्रोंको लाना
    • वेद-स्तुति
    • दशम स्कन्ध—निरोध-लीला
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    एकादश स्कन्ध
    • मुक्ति-लीला
    • यदुवंशके नष्ट होनेका शाप
    • वसुदेवजीको नारदजीका उपदेश
    • कृष्ण-उद्धव-संवाद
    • दत्तात्रेयजीका राजा यदुको उपदेश
    • भगवान‍् श्रीकृष्णका उद्धवजीको हंस-गीताका उपदेश
    • सबसे बड़ा दान और सबसे बड़ा तप
    • ज्ञानी और मूर्ख
    • स्वर्ग-नरक तथा जीव और ईश्वर
    • दुखी और सुखी
    • भगवान‍्का उद्धवजीको अपनी चरण-पादुकाएँ देना
    • भक्त पुण्डरीककी कथा
    • द्वादश स्कन्ध
  • अंतिम पृष्ठ

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