॥ श्रीहरि:॥

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भगवच्चर्चा (सभी छहों भाग एक साथ)

श्रद्धेय श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार

हिन्दी/संस्कृत

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  • प्रार्थना
  • निवेदन
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    तुलसी-दल (भाग-१)
    • मधुर स्वर सुना दो!
    • तेरी हँसी
    • प्यारे कन्हैया!
    • दिव्य सन्देश
    • शीघ्र चेतो!
    • श्रीभगवन्नाम
    • प्रेम-तत्त्व
    • भक्ति-सुधा-सागर-तरंग
    • भक्त
    • भगवत्कृपा और भक्त
    • ईश्वरभक्त
    • भगवत्प्रेम
    • बुद्धिवाद और भक्ति
    • भगवत्प्रेम ही विश्वप्रेम है
    • भगवद्दर्शन
    • क्या दूसरे भी देख-सुन सकते हैं?
    • भगवान् कहाँ रहते हैं?
    • स्वागतकी तैयारी करो
    • मोक्ष-संन्यासिनी गोपियाँ
    • गोपी-प्रेम
    • चार प्रश्न
    • भगवत्-शरणागति
    • रामायण हमें क्या सिखाती है?
    • हे राम!
    • विनय
    • भगवत्-कृपा
    • कामना
    • ग्वालिनीका प्रेम
  • +
    नैवेद्य (भाग-२)
    • चेतावनी!
    • हम चाहते नहीं
    • गीता और भगवान् श्रीकृष्ण
    • जीवकी तृप्ति कैसे हो?
    • अभिमान!
    • सत्संग
    • गीतामें व्यक्तोपासना
    • उन्नतिका स्वरूप
    • तुम्हारा स्वराज्य
    • दीवानोंकी दुनिया
    • गीताका पर्यवसान साकार ईश्वरकी शरणागतिमें है
    • गुरु-शिष्य-संवाद
    • भगवान‍्के विभिन्न स्वरूपोंकी एकता
    • श्रद्धाकी कमीका कारण
    • क्या ईश्वरके घर न्याय नहीं है?
    • सच्ची साधना
    • तृष्णा
    • भक्तिके साधन
    • ईश्वर-विरोधी हलचल
    • ईश्वरकी ओर झुकें
    • श्रीरुक्मिणीका अनन्य प्रेम
    • सद‍्गुणवती कैकेयी
    • सती-महिमा
    • वशीकरण
    • होली और उसपर हमारा कर्तव्य
    • दीवाली
    • फुरसत निकालो
    • पहिले अपनी ओर देखो!
    • संत और बिच्छू
    • तुम आगे आते
    • प्रार्थना
    • कामना
    • प्रार्थना
  • +
    भगवत्प्राप्ति एवं हिंदू-संस्कृति (भाग-३)
    • ध्यानयोग
    • अवतार-तत्त्व
    • भगवान‍् सगुण हैं या निर्गुण?
    • भक्तके लक्षण
    • भजनकी आवश्यकता
    • भगवत्प्राप्तिके उपाय
    • धारण करनेयोग्य ५१ बातें
    • महाभारतमें अधर्म और धर्मका युद्ध
    • गृहस्थोंके लिये साधारण नियम
    • ग्यारह पालनीय नियम
    • श्रीकृष्ण और अर्जुनकी मैत्री
    • श्रीकृष्ण और द्रौपदी
    • शिव-पूजाका फल
    • दक्ष-यज्ञ-विध्वंस
    • भगवान‍् शिव
    • देवीका विराट् स्वरूप
    • भगवान‍् श्रीकृष्ण और भगवान‍् शिव
    • भगवान‍् विष्णुका स्वप्न
    • शिव-विष्णुका अलौकिक प्रेम
    • भगवान‍् श्रीशिव और भगवान‍् श्रीराम
    • भगवान‍्की लीला
    • वैष्णवोंकी द्वादशशुद्धि
    • सदाचार
    • श्रीकृष्णके विराट् स्वरूप
    • भाव-राज्यकी महिमा
    • तीन प्रकारके यात्री
    • ‘लंगर मोरि गागर फोरि गयो’
    • प्रेमयोग
    • परम धर्म तथा मोक्ष-मार्ग
    • गुरु-तत्त्व
    • सद‍्गुरु
    • सुहृद् समझते ही मुक्ति
    • एक उपाय
    • अल्पमें सुख नहीं है
    • पुरुषोत्तम-तत्त्व
    • ईश्वर-प्राप्तिके उपाय
    • दैवी विपत्तियाँ और उनसे बचनेका उपाय
    • दूसरोंसे वैसा ही व्यवहार करो जैसा उनसे अपने लिये चाहते हो
    • प्राच्य और पाश्चात्य संस्कृति
    • संस्कृतिके रक्षण और प्रसारमें बाधक तीन महाभ्रम
    • हिंदू-संस्कृतिका स्वरूप
    • पिंजरापोल और गोशाला
    • गोरक्षापर कुछ स्फुट विचार
    • गोरक्षाके चौबीस साधन
    • गोरक्षाका सर्वोत्तम साधन—भगवत्प्रार्थना
    • गो-महिमा
    • गो-मन्त्र-जापसे पापनाश
    • गोबरमें लक्ष्मीजीका निवास
    • बारह निर्दयताएँ
    • शुभ-संग्रह
    • सनातन-(विश्वमानव-) धर्मके ज्ञान, ग्रहण और प्रसारकी आवश्यकता
  • +
    साधकोंका सहारा (भाग-४)
    • सन्त-महिमा
    • निर्भरा भक्ति
    • वर्णाश्रमधर्म और ब्राह्मण
    • वर्णाश्रम-धर्म
    • साधकोंसे
    • भगवान‍्का स्मरण कैसे करें?
    • परमार्थ-साधनके आठ विघ्न
    • पाप विषयासक्तिसे होते हैं, प्रारब्धसे नहीं
    • मौन व्याख्यान
    • श्रीरामका स्वरूप और उनकी प्रसन्नताका साधन
    • सच्चिदानन्दके ज्योतिषी
    • राममाता कौसल्याजी
    • भक्तिमयी सुमित्रा देवी
    • श्रीलक्ष्मण और देवी उर्मिलाका महत्त्व
    • श्रीशत्रुघ्नजी
    • श्रीरामप्रेमी दशरथ महाराज
    • श्रीरामकी पुन: लंका-यात्रा और सेतु-भंग
    • श्रीरामका प्रणत-रक्षा-प्रण
    • श्रीरामका राजधर्मोपदेश
    • भगवान् श्रीरामका श्रीलक्ष्मणको उपदेश
    • दशरथके समयकी अयोध्या
    • रामायणकी प्राचीनता
    • श्रीरामायण-माहात्म्य
    • श्रीरामचरितमानस सच्चा इतिहास है
    • साधन-भक्तिके चौंसठ अंग
    • सेवापराध और नामापराध
    • भगवदनुराग
    • विषय और भगवान्
    • सच्चा भिखारी
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    • श्रीवृषभानुनन्दिनीसे प्रार्थना
    • श्रीराधाजी कौन थीं?
    • परा और अपरा विद्या
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    • दु:खनाशके अमोघ उपाय
    • नैतिक पतन और उससे बचनेके उपाय
    • महापापीके उद्धारका परम साधन
    • चातककी प्रेम-साधना
    • भोजन-साधन
    • शरण-साधन
    • अहिंसा परम धर्म और मांस-भक्षण महापाप
    • सरल नाम-साधन
  • +
    भगवच्चर्चा (भाग-५)
    • ईश्वर
    • भगवान् शिव
    • भगवती शक्ति
    • मृत्युंजययोग
    • युगल सरकारकी उपासना और ध्यान
    • श्रीभगवन्नाम
    • पंचमहायज्ञ
    • साध्य और साधन
    • धर्मरक्षाके लिये भगवदाश्रयकी आवश्यकता
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    • श्रीभगवान् के पूजन और ध्यानकी विधि
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    • अद्भुतकर्मी श्रीकृष्ण
    • नारदकृत राधास्तवन
    • श्रीराधिकाजीका उद्धवको उपदेश
    • श्रीराधाजीके प्रति भगवान् श्रीकृष्णका तत्त्वोपदेश
    • श्रीकृष्ण-लीलाके अन्ध-अनुकरणसे हानि
    • भीख
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    • प्रेमभक्तिमें भगवान् और भक्तका सम्बन्ध
    • भगवान् को पानेका उपाय
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    • मनुष्य-जीवनके कुछ दोष
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    • पिता-पुत्रका कल्याणकारी संवाद
    • यज्ञ
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    • प्रेममें ही सबका कल्याण है
    • भगवान् को आर्तभावसे पुकारते ही रक्षा हो गयी
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    • सेवाकी सात आवश्यक बातें
    • भक्तकी परख
    • मनन करनेयोग्य
    • भगवान् प्रेमस्वरूप हैं
    • कुसंग छोड़कर महापुरुषोंका संग करो
  • +
    पूर्ण-समर्पण (भाग-६)
    • पूर्ण-समर्पण
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    • कुछ पारमार्थिक शब्दोंके अर्थ
    • भगवान‍्के आश्वासनपर विश्वास करो
    • भक्त और चमत्कार
    • गीताके दो प्रधान पात्र
    • त्यागका स्वरूप और साधन
    • भक्ति और भक्तका स्वरूप तथा भक्तिकी महिमा
    • प्राचीन आचार
    • भगवान‍्का भजन करनेकी विधि
    • पत्नीका परित्याग कदापि उचित नहीं!
    • पतिका धर्म
    • स्त्रीका अपराध
    • राजनीतिक आन्दोलनमें भाग लेनेवाले भाई-बहिनोंसे—
    • प्रेमकी पराकाष्ठा
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    • श्रीविष्णुप्रियाजीको पादुका-दान
    • भक्तको दु:ख नहीं होता
    • पुरुषोत्तम-मासके नियम
    • श्रीरामनवमी
    • सर्वत्र भगवद्दर्शन और व्यवहार
    • सबका कल्याण हो
    • पाँच प्रकारके पुत्र
    • सत्कर्म करो, परंतु अभिमान न करो
    • कुछ प्रश्नोंका उत्तर
    • अन्तर्याग और बहिर्याग
    • श्रीशुकदेवजी
    • भक्तका महत्त्व
    • स्वाधीनता या स्वराज्य
    • विनाशके पथपर
    • साहित्यका सदुपयोग
    • नारी-निन्दाकी सार्थकता
    • आजका भ्रष्टाचार और उससे बचनेका उपाय
    • तमाखूसे हानि
    • होलीपर कर्तव्य
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