॥ श्रीहरि:॥

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भगवच्चर्चा

श्रद्धेय श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार

हिन्दी/संस्कृत

भाईजी (श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार) के लेखोंका एक और सुन्दर चयन भगवच्चर्चा के नामसे जनताकी सेवामें प्रस्तुत किया जा रहा है। इस संग्रहमें कतिपय स्फुट विषयोंके साथ-साथ कृष्णभक्तोंके लिये अतिशय उपादेय ठोस सामग्रीका समावेश हुआ है। इसमें युगल सरकारकी उपासना और ध्यान, श्रीभगवन्नाम, माखनचोरीका रहस्य, चीरहरण-रहस्य, रासलीलाकी महिमा, व्रजसुन्दरियोंके भगवान् , नादब्रह्म—मोहनकी मुरली, श्रीकृष्णकी नित्य प्रात:क्रिया, अद्भुतकर्मा श्रीकृष्ण, नारदकृत राधास्तवन, श्रीराधिकाजीका उद्धवको उपदेश, श्रीराधाजीके प्रति भगवान् श्रीकृष्णका तत्त्वोपदेश, श्रीकृष्णलीलाके अन्ध-अनुकरणसे हानि, काली कृष्ण, भक्तिका स्वरूप, प्रेमभक्तिमें भगवान् और भक्तका सम्बन्ध आदि ऐसे परमोपयोगी एवं रहस्यपूर्ण विषयोंपर मार्मिक प्रकाश डाला गया है कि जिससे भगवान् श्रीकृष्णके उपासकोंको अपने मार्गमें बड़ी सहायता मिलेगी। साथ-ही-साथ ईश्वर-तत्त्व एवं परम तत्त्वके दो अन्य उपास्य स्वरूपों—भगवान् शिव एवं भगवती शक्तिका भी बड़ी ही सुन्दर एवं शास्त्रानुमोदित शैलीसे विवेचन किया गया है। इस प्रकार पिछले संग्रहोंकी भाँति वर्तमान संग्रह भी जिज्ञासुओंके लिये परमोपयोगी बन गया है। आशा है, इसका भी धर्मप्राण जनता उतने ही चाव एवं आदरके साथ स्वागत करेगी।
  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • +
    ईश्वर
    • ईश्वर बुद्धिगम्य नहीं है
    • ईश्वरकी उपासना करनी चाहिये
    • ईश्वरका स्वरूप
    • ईश्वर-विश्वास और ईश्वर-कृपा
    • मूर्ति-पूजा
    • अवतार
    • साकार रूप मायिक नहीं है
    • भगवान् की नित्य-लीला
    • ईश्वर-विश्वासकी आवश्यकता
    • सब फल ईश्वर ही देता है
    • दैवीसम्पत्तिकी आवश्यकता
    • ईश्वरवादियोंके पाप
    • हमें क्या करना चाहिये?
  • +
    भगवान् शिव
    • शिव एक हैं
    • शिवके रूप कल्पना नहीं हैं
    • शिवपूजा
    • शिव तामसी देवता नहीं हैं
    • शिव मोक्षदाता हैं
    • शिवरूपका रहस्य गहन है
    • कल्याणरूप शिव
    • लिंग-शब्दका अर्थ
    • शिवनिर्माल्य
  • +
    भगवती शक्ति
    • परिणामवाद
    • मायावाद
    • आभासवाद
    • माया अनादि और सान्त है
    • मायाशक्ति अनिर्वचनीय है
    • मायाशक्ति और महाशक्ति
    • निर्गुण और सगुण
    • शक्ति और शक्तिमान्
    • शक्ति और शक्तिमान् की अभिन्नता
    • शक्तिकी महिमा
    • शक्तिकी शरण
    • तामसीको नरक-प्राप्ति
    • तन्त्रके नामपर व्यभिचार और हिंसा
    • बलिदान
    • बलिदान करो
    • किसीका बुरा न चाहो
    • केवल माँको ही चाहो
    • आत्मसमर्पणके द्वारा माँको स्नेहसूत्रमें बाँध लो
    • परम सुखकी प्राप्ति
    • मूर्ख और पापाचारी
    • रूपका मोह छोड़ दो
    • धनका लोभ त्याग करो
    • मान-बड़ाईमें मत फँसो
    • सदाचार-शक्तिको बढ़ाओ
    • भगवान् को बाँधनेकी डोरी
    • माँके उपदेशोंपर ध्यान दो
    • श्रद्धा-शक्ति
    • मानसिक शक्ति
    • ईश्वरीय शक्तिकी प्रबलता
    • नर-नारी सभी भगवान् के रूप हैं
    • माँ दुर्गाका अपमान
    • विधवा नारीकी पूजा
    • नारी-शक्तिसे निवेदन
    • माँ सबका कल्याण करें
  • मृत्युंजययोग
  • +
    युगल सरकारकी उपासना और ध्यान
    • भगवान् का रूप
    • निराकार और साकारके उपासककी गति
    • शक्तिसहित उपासना
    • द्वादश शुद्धि
    • पंचप्रकार पूजा
    • न्यास
    • प्रपत्ति
    • शरणागति
    • आत्मसमर्पण
    • मुख्य साधन और भाव
    • सद्‍गुरु
    • अधिकारी शिष्य
    • अधिकारी शिष्यके कर्तव्य
    • मन्त्र
    • दीक्षा
    • श्रीराधाकृष्णका तात्त्विक स्वरूप
    • श्रीराधा-कृष्णका ध्यान
    • स्वरूप-साक्षात्कार
    • सरल साधन
    • २—प्रार्थना
  • श्रीभगवन्नाम
  • +
    पंचमहायज्ञ
    • यज्ञार्थ कर्म क्या है?
    • पंचमहायज्ञ
    • ऋषि
    • देवता
    • पितर
    • मनुष्य
    • भूतप्राणी
    • पंचमहायज्ञ किस प्रकार करें?
    • ऋषियज्ञ या ब्रह्मयज्ञ
    • देवयज्ञ
    • पितृयज्ञ
    • मनुष्ययज्ञ
    • भूतयज्ञ
  • साध्य और साधन
  • धर्मरक्षाके लिये भगवदाश्रयकी आवश्यकता
  • पाँच दिशाएँ
  • दुर्व्यवहारसे दुर्गति
  • उपनिषद्‍में युगल-स्वरूप
  • श्रीभगवान् के पूजन और ध्यानकी विधि
  • माखनचोरीका रहस्य
  • चीरहरण-रहस्य
  • रासलीलाकी महिमा
  • व्रजसुन्दरियोंके भगवान्
  • नादब्रह्म—मोहनकी मुरली
  • बालगोपाल सच्चिदानन्दकी स्तुति
  • श्रीकृष्णकी नित्य प्रात:क्रिया
  • +
    अद्भुतकर्मी श्रीकृष्ण
    • अवतरण
    • कुबेरपुत्रोंका उद्धार
    • ब्रह्माजीको लीलाप्रदर्शन
    • दावानल-पान
    • गोवर्द्धन-पूजा
    • वरुणलोकमें पूजा
    • गोपोंको ब्रह्म और परम-धामदर्शन
    • रासलीला
    • सुदर्शनका उद्धार
    • शंखचूड़का उद्धार
    • मथुरायात्रामें अक्रूरको भगवद्दर्शन
    • कुब्जाको सीधी करना
    • अनेक रूप दिखाना
    • मृत गुरु-पुत्रको लाना
    • नृगका उद्धार
    • ऋषियोंद्वारा स्तुति
    • मृत देवकीपुत्रोंको लाना
    • मिथिलामें विविध रूप
    • हरेक महलमें श्रीकृष्ण
    • परमधाम-प्रयाण
  • नारदकृत राधास्तवन
  • श्रीराधिकाजीका उद्धवको उपदेश
  • श्रीराधाजीके प्रति भगवान् श्रीकृष्णका तत्त्वोपदेश
  • श्रीकृष्ण-लीलाके अन्ध-अनुकरणसे हानि
  • भीख
  • काली कृष्ण
  • +
    भक्तिका स्वरूप
    • भक्तिकी उपाधियाँ
    • सकाम भक्ति
    • उत्तमा भक्ति
    • साधन-भक्ति
    • भाव-भक्ति
    • प्रेम-भक्ति
  • प्रेमभक्तिमें भगवान् और भक्तका सम्बन्ध
  • +
    भगवान् को पानेका उपाय
    • सत्संग
  • वह दिन कब आयेगा
  • एक लालसा
  • आवश्यक साधन
  • +
    दस प्रकारकी नौ-नौ बातें
    • (माननेकी और छोड़नेकी)
  • मनुष्य-जीवनके कुछ दोष
  • अशरण-शरण
  • हमारा पाप
  • पिता-पुत्रका कल्याणकारी संवाद
  • यज्ञ
  • मानवताका कल्याण
  • प्रेममें ही सबका कल्याण है
  • भगवान् को आर्तभावसे पुकारते ही रक्षा हो गयी
  • पाँच प्रश्न
  • सेवाकी सात आवश्यक बातें
  • भक्तकी परख
  • मनन करनेयोग्य
  • भगवान् प्रेमस्वरूप हैं
  • कुसंग छोड़कर महापुरुषोंका संग करो
  • अन्तिम पृष्ठ

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