ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाजीके सिद्धान्तों, उपदेशों तथा वचनोंसे लाखों-लाखों नर-नारी आध्यात्मिक लाभ उठा चुके हैं और उठा रहे हैं। संवत् २०२२ में भगवती भागीरथीके पुनीत तटपर वे देह त्यागकर ब्रह्मलीन हो गये। इससे अब उनके नये वचनोंका साक्षात् -रूपसे प्राप्त करना हम सबके लिये असम्भव हो गया है। यह वास्तवमें बहुत-बहुत हानि है। पर इसके लिये हम सभी निरुपाय हैं। इस छोटे-से ग्रन्थ आत्मोद्धारके सरल उपाय से सब लोग लाभ उठावें, यह विनीत प्रार्थना है।