॥ श्रीहरि:॥

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आत्मोद्धारके साधन

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

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  • निवेदन
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    महाभारतमें जीवनको उन्नत बनानेवाले कुछ शिक्षाप्रद प्रसंग
    • आश्रमधर्म
    • वर्ण-धर्म
  • सत्कथाकी महिमा
  • धर्मपालनार्थ प्राणोत्सर्गसे श्रेय-प्राप्ति
  • लोकसंग्रहरूप आदर्श कर्मका तत्त्व-रहस्य
  • वर्तमान दोषोंके निवारणकी आवश्यकता
  • निष्कामभावका तत्त्व-रहस्य
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    कर्मयोगके पाँच भेद
    • १-केवल कर्मयोग
    • २-भक्ति-गौण कर्मयोग
    • ३-भक्ति-सामान्य कर्मयोग
    • ४-भक्तिप्रधान कर्मयोग
    • ५-केवल भक्तियोग
  • सर्वदु:ख दोषनाशक तप
  • पतन या उत्थानमें मनुष्य स्वतन्त्र है
  • निष्काम कर्मसे परमात्माकी प्राप्ति
  • युक्त आहार-विहारसे परमात्माकी प्राप्ति
  • पति-पत्नीके परस्पर कर्तव्य
  • साधनकी सफलताके उपाय
  • धर्मकी हानि और पापकी वृद्धिके निवारणके उपाय
  • +
    सच्चिदानन्दघन ब्रह्मके तत्त्वका विवेचन
    • सत्ता
    • चेतनता
    • आनन्द
    • समता
    • अनन्तता
    • व्यापकता
  • अन्तिम पृष्ठ

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