॥ श्रीहरि:॥

gstlogo
हिन्दीarrowdown
आत्मकल्याण के विविध उपाय

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका भगवत्प्राप्त युगपुरुष थे। यह पुस्तक उन्हींके प्रवचनोंका परमोपयोगी संग्रह है। वे केवल मानवमात्र ही नहीं, अपितु जीवमात्रको भगवत्प्राप्तिका अधिकारी बनाने-हेतु सतत प्रयत्नशील थे। आशा है, इस पुस्तकमें उनके द्वारा बताये आत्मकल्याणकारी सुगम उपायोंको पाठकगण मननपूर्वक पढ़कर स्वयं लाभान्वित होंगे एवं अन्य लोगोंमें भी प्रचार करके उन्हें लाभ पहुँचावेंगे।
  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • भोग दु:खरूप है
  • वैराग्य एवं प्रेमका विवेचन
  • महापुरुषकी महिमा
  • आत्मकल्याणकी आवश्यकता
  • दैवी-सम्पदा प्राप्त करनेका उपाय
  • सभीका कल्याण चाहना श्रेष्ठ है
  • सत्संगका स्वरूप
  • ध्यानकी महिमा
  • संसारके कल्याणके लिये एक महात्मा ही पर्याप्त है
  • सार बातें
  • गीतापाठमें भावकी प्रधानता
  • निष्कामभावका मूल्य भगवान् हैं
  • राग-द्वेषके नाशसे प्रभुका सामीप्य
  • परमात्मप्राप्तिके आठ साधन
  • क्रियाकी अपेक्षा भावकी विशेषता
  • स्वार्थत्यागकी महिमा
  • अन्तिम पृष्ठ

सम्बंधित ई-पुस्तकें

ध्यानावस्था में प्रभु से वार्तालाप

ध्यानावस्था में प्रभु से वार्तालाप

मनुष्य का परम कर्तव्य

मनुष्य का परम कर्तव्य

गीता के परम प्रचारक

गीता के परम प्रचारक

स्त्रियों के लिये कर्तव्य शिक्षा

स्त्रियों के लिये कर्तव्य शिक्षा

नल दमयन्ती

नल दमयन्ती