॥ श्रीहरि:॥

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अपात्रको भी भगवत्प्राप्ति

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

अपात्रको भी भगवत्प्राप्ति जीवन्मुक्त तत्त्वज्ञ भगवत्प्रेमी ब्रह्मलीन परमश्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका के बारह प्रवचनोंका संग्रह है, जिनमें ग्यारह प्रवचन प्राचीन कैसेटोंसे लिये गये हैं। पुस्तकमें प्रमुख प्रतिपाद्य विषय आत्म-कल्याण और भगवत्प्राप्ति है। पूरी पुस्तकमें भक्तिका स्वर सर्वाधिक मुखर है। ज्ञान-चर्चा भी भक्तिका रंग लिये हुए है। भक्तिका यह रथ श्रद्धा और विश्वासके चक्रोंपर चला है। अजामिल-जैसे अपात्रका भी उद्धार हुआ, यह पुस्तकके नामकरणकी सार्थक पीठिका है। ‘नियमोंके पालनसे कल्याण’ शीर्षक लेखमें आरुणि और उपमन्युके उपाख्यानोंद्वारा श्रद्धा और विश्वासका महत्त्व बड़े सशक्त रूपसे प्रतिपादित किया गया है। ‘प्रमाद ही मृत्यु है’ शीर्षक लेखमें सनत्सुजातके सूत्रात्मक उपदेशकी विस्तृत व्याख्या है और हमारे दैनिक आचरणसे सम्बन्धित प्रमादों (जिन्हें परमश्रद्धेय गोयन्दकाजीने चोरीकी संज्ञा दी है)- के विविध आयामोंका विवेचन है। आशा है, भगवत्प्रेमी पाठकोंको इस पुस्तकसे एक नयी दिशा मिलेगी।
  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • “उदाराः सर्व एवैते” का रहस्य- अपात्रको भी भगवत्प्राप्ति
  • महापुरुषोंका रहस्य क्या है?
  • भगवान् और महापुरुषोंके बलपर साधन तेज करना
  • समता
  • नियमोंके पालनसे कल्याण
  • सबमें निष्काम प्रेम और शोक-निवृत्तिके उपाय
  • प्रेमका तत्त्व-रहस्य
  • भक्त और भगवान‍्की परस्पर लीला
  • अनन्य विशुद्ध प्रेम
  • प्रमाद ही मृत्यु है
  • शरणागतिकी तीन शाखाएँ
  • वासुदेवः सर्वम्
  • अन्तिम पृष्ठ

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