सूर-पदावलीका यह पाँचवाँ संग्रह ‘अनुराग-पदावली’ के नामसे सूर-काव्यके प्रेमियोंकी सेवामें प्रस्तुत किया जा रहा है। जैसा कि इसके नामसे ही प्रकट है, इस संग्रहमें केवल ऐसे पदोंका चयन किया गया है, जिनमें श्रीगोपांगनाओंके श्रीकृष्णविषयक अनुरागकी चर्चा की गयी है। इनमेंसे अधिकांश पदोंमें तो उन कृष्णानुरागिणी व्रजललनाओंके अनूठे प्रेमोद्गार ही सूरकी हृदयस्पर्शिनी वाणीसे प्रवाहित हुए हैं। एक-से-एक सरस एवं मार्मिक उक्तियाँ हैं, जिनका स्वाद उन्हें पढ़नेपर ही मिलता है।