॥ श्रीहरि:॥

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अन्त्यकर्म श्राद्धप्रकाश

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • मंगलाचरण
  • निवेदन
  • +
    जाननेयोग्य आवश्यक बातें
    • श्राद्धकी परिभाषा
    • श्राद्धकर्ताका भी कल्याण
    • श्राद्धसे मुक्ति
    • श्राद्ध न करनेसे हानि
    • श्राद्ध न करनेवालेको कष्ट
    • पितरोंको श्राद्धकी प्राप्ति कैसे होती है?
    • ब्राह्मण-भोजनसे भी श्राद्धकी पूर्ति
    • धनाभावमें भी श्राद्धकी सम्पन्नता
    • श्राद्धके अधिकारी
    • श्राद्धके भेद
    • मृत्युतिथि तथा पितृपक्षमें श्राद्ध करना आवश्यक
    • श्राद्धकी संक्षिप्त विधि
  • +
    वार्षिक तिथिपर तथा पितृपक्षकी तिथियोंपर किया जानेवाला सांकल्पिकश्राद्ध
    • वार्षिकतिथिपर ब्राह्मणभोजनात्मक सांकल्पिक श्राद्ध
    • पंचबलिविधि
    • वार्षिकतिथिपर आमान्नदानात्मक सांकल्पिकश्राद्ध
    • समस्त पितरोंका ब्राह्मणभोजनात्मक सांकल्पिकश्राद्ध
    • समस्त पितरोंका आमान्नदानात्मक सांकल्पिकश्राद्ध
  • स्त्री, अनुपनीत द्विज तथा द्विजेतरोंके द्वारा श्राद्ध करनेकी व्यवस्था
  • +
    अशौच-विचार
    • बालकोंकी मृत्युपर अशौच-विचार
    • बालकोंके श्राद्धकी व्यवस्था
  • गयाश्राद्ध तथा बदरीनारायणमें ब्रह्मकपाली-श्राद्धपर विचार
  • +
    श्राद्धमें प्रयोजनीय एवं प्रशस्त आवश्यक बातें
    • श्राद्धमें आठ दुर्लभ प्रयोजनीय
    • श्राद्धमें कुश तथा कृष्ण तिलकी महिमा
    • श्राद्धमें रजत (चाँदी)-की महिमा
    • श्राद्धमें अत्यन्त पवित्र प्रयोजनीय
    • श्राद्धमें महत्त्वके सात प्रयोजनीय
    • श्राद्धमें तुलसीकी महिमा
    • श्राद्धमें तीन गुणोंकी आवश्यकता
    • श्राद्धमें ग्राह्य पुष्प
    • श्राद्धदेश
    • श्राद्धमें प्रशस्त अन्न फलादि
    • श्राद्धमें प्रशस्त ब्राह्मण
    • प्रशस्त आसन
    • श्राद्धमें भोजनके समय मौन आवश्यक
    • पिण्डकी अष्टांगता
    • पिण्डका प्रमाण
    • श्राद्धमें पात्र
    • श्राद्धमें पाद-प्रक्षालन-विधि
  • +
    श्राद्धमें वर्ज्य—निषिद्ध बातें
    • श्राद्धकर्ताके लिये निषिद्ध सात बातें
    • श्राद्धभोक्ताके लिये आठ वस्तुओंका निषेध
    • श्राद्धमें लोहेके पात्रका सर्वथा निषेध
    • श्राद्धमें निषिद्ध कुश
    • श्राद्धमें निषिद्ध गन्ध
    • श्राद्धमें त्याज्य पुष्प
    • निषिद्ध धूप
    • श्राद्धमें निषिद्ध ब्राह्मण
    • श्राद्धमें निषिद्ध अन्न
    • श्राद्धमें मांसका निषेध
  • श्राद्धसे जगत् की तृप्ति
  • +
    प्रमाण-संग्रह
    • (१) अन्त समयमें एक बार भगवन्नामोच्चारणसे परमगतिकी प्राप्ति
    • (२) गंगाकी संनिधिमें मृत्युसे मोक्षकी प्राप्ति
    • (३) मरणासन्नावस्थामें तुलसी एवं शालग्रामके सांनिध्यसे विष्णुलोककी प्राप्ति
    • (४) दाह-संस्कारसे पूर्व रोनेका निषेध
    • (५) उद्यापनके बिना व्रतकी निष्फलता
    • (६) ब्राह्मणवचनोंसे व्रतकी पूर्णता
    • (७) दान देनेवाले तथा ग्रहण करनेवालेकी पूर्वोत्तराभिमुखता
    • (८) आचमनके जलकी मात्रा
    • (९) आचमनके अनन्तर भी पवित्रीकी पवित्रता
    • (१०) गोदानसे जीवनभरके पापोंका नाश
    • (११) और्ध्वदैहिक दानकी गयाश्राद्धसे भी अधिक महिमा
    • (१२) और्ध्वदैहिक दानकी अवश्यकरणीयता
    • (१३) दस महादान कौनसे हैं?
    • (१४) अष्ट महादान कौनसे हैं?
    • (१५) सप्तधान्य
    • (१६) धान्य आदिकी परिभाषा
    • (१७) आचमन-दान
    • (१८) शवके कर्णनासादि छिद्रोंमें स्वर्ण-प्रक्षेप तथा घृत-प्रक्षेपका विधान
    • (१९) अस्पृश्यद्वारा शवस्पर्श होनेपर प्रायश्चित्तकी आवश्यकता
    • (२०) शूद्रादिद्वारा लायी गयी दाहादि सामग्रीकी निष्फलता
    • (२१) पितृकर्ममें अपसव्यत्व एवं दक्षिणाभिमुखता
    • (२२) चिता-पिण्डदानके अनन्तर प्रेत संज्ञा
    • (२३) अन्त्येष्टिकर्ममें छ: पिण्डदानका प्रयोजन
    • (२४) कुशास्तरणसे पूर्व अवनेजन-दानका विधान
    • (२५) शवका सिर और मुख किस दिशामें करे?
    • (२६) दाहमें तुलसीकाष्ठका प्राशस्त्य
    • (२७) नग्न शवके दाहका निषेध
    • (२८) दाहके लिये निषिद्ध अग्नि
    • (२९) पंचकदाह और पंचकशान्ति
    • (३०) चिताग्नि सिरकी ओर दे
    • (३१) कपालक्रिया
    • (३२) कपालक्रियाके अनन्तर रोनेपर मृतात्माको सुखकी प्राप्ति
    • (३३) शवकी सात प्रदक्षिणा
    • (३४) शवदाहकी प्रक्रिया
    • (३५) गंगा-किनारे दाह होनेपर अस्थि-विसर्जन
    • (३६) गंगामें अस्थि-विसर्जनकी महिमा
    • (३७) दाहके अनन्तर गृहप्रवेशके पूर्वके कृत्य
    • (३८) दाहकर्ता तथा सपिण्डी अशौचियोंके पालनीय नियम
    • (३९) देशाचारकी प्रामाणिकता
    • (४०) अशौचमें क्या न करे
    • (४१) आशौचमें की जानेवाली सन्ध्याका स्वरूप
    • (४२) दस दिनतक दीप-दान तथा दीपककी दिशा
    • (४३) दशगात्रके दस पिण्डोंसे यातना-देहका निर्माण
    • (४४) श्राद्धदेशका स्वरूप
    • (४५) पिण्डदानका द्रव्य
    • (४६) श्राद्धमें हाथसे बनाये गये मिट्टीके पात्रोंका प्रयोग
    • (४७) दशगात्रके दस पिण्डदानोंकी व्यवस्था
    • (४८) दशगात्रके बीचमें अमावास्याके आनेपर
    • (४९) अशौच-प्रवृत्तिकी व्यवस्था
    • (५०) रात्रिमें जन्म, मरण या रजोदर्शन होनेपर अशौचकालकी व्यवस्था
    • (५१) मासिकादि श्राद्धोंमें तिथि-ग्रहणकी व्यवस्था
    • (५२) ताताम्बादि पितृ-परिगणन
    • (५३) दसवें दिन मुण्डन एवं क्षौरका विधान
    • (५४) प्रेतश्राद्धमें निषिद्ध कर्म१
    • (५५) एकादशाहसे समन्त्रक श्राद्ध प्रारम्भ
    • (५६) उत्तरीय वस्त्रकी अनिवार्यता
    • (५७) नारायणबलिकी आवश्यकता
    • (५८) मध्यमषोडशीकी आवश्यकता
    • (५९) मध्यमषोडशीके षोडश पिण्डदानका स्वरूप तथा उल्मुक-स्थापन
    • (६०) श्राद्धमें पितृगायत्रीका पाठ
    • (६१) नीवीबन्धन एवं आवाहन
    • (६२) पितृकार्यमें पातितवामजानु
    • (६३) श्राद्धमें एकतन्त्रकी निवृत्ति कहाँ-कहाँ
    • (६४) मण्डलकरण एवं अग्नौकरण
    • (६५) देवपात्रालम्भन तथा पितृपात्रालम्भन
    • (६६) अंगुष्ठनिवेशन
    • (६७) भोजनपात्रोंसे तिलादिका अपसारण
    • (६८) विकिरदान कहाँ करे?
    • (६९) दानमें दी जानेवाली शय्याकी दिशा
    • (७०) शय्यादानका स्वरूप
    • (७२) शय्याकी प्रदक्षिणा
    • (७३) शय्यादानका प्रयोजन और उसका फल
    • (७४) वृषोत्सर्गकी महिमा
    • (७५) वृषका विकल्प
    • (७६) उत्सर्ग किये जानेवाले वृष एवं वत्सतरीकी अवस्था
    • (७७) नील वृषभका सामान्य लक्षण
    • (७८) पति-पुत्रवती नारीके निमित्त वृषोत्सर्ग न करे
    • (७९) वृषका उत्सर्ग कहाँ करे?
    • (८०) वृषोत्सर्गके वृषका अंकन
    • (८१) नवग्रहोंकी समिधाएँ
    • (८२) कुशब्रह्मा
    • (८३) आद्य (महैकोद्दिष्ट)-श्राद्धकी आवश्यकता
    • (८४) ऊह-विचार
    • (८५) अर्घपात्रोंकी स्थापनाका प्रकार
    • (८६) कौन श्राद्ध किस समय करे
    • (८७) एकोद्दिष्टके अनन्तर ही पार्वणश्राद्धकी करणीयता
    • (८८) ब्राह्मण-दम्पतिको भोजन
    • (८९) विभक्तिनिर्णय
    • (९०) पवित्रीधारणकी अनिवार्यता
    • (९१) विभिन्न श्राद्धोंमें विश्वेदेव-निरूपण
    • (९२) सपिण्डीकरणश्राद्धमें अर्घोंका संयोजन तथा प्रेतशब्दका प्रयोग
    • (९३) स्वाहा-स्वधा कहाँ नहीं होगा?
    • (९४) पितरोंके लिये अपसव्य तथा वामावर्त
    • (९६) पार्वणविधिसे किये जानेवाले सांकल्पिकश्राद्धमें निषिद्धकर्म
    • (९७) तीर्थश्राद्धमें निषिद्ध कर्म
    • (९८) दशविधस्नान
    • (९९) पिण्डप्रतिपत्ति
    • (१००) ऊनश्राद्धोंकी निषिद्ध तिथियाँ
    • (१०१) सर्वौषधि तथा सप्तमृत्तिका
    • (१०२) पंचपल्लव एवं पंचरत्न
    • (१०३) पितरोंकी प्रसन्नतासे श्राद्धकर्ताका परम कल्याण
  • श्राद्धसम्बन्धी पारिभाषिक शब्दावली
  • +
    मरणासन्न-अवस्थामें करनेयोग्य कार्य
    • देह-त्यागके पहलेके कृत्य
    • संक्षिप्त अष्टमहादानविधि
  • +
    देह-त्यागके बादके कृत्य
    • तात्कालिक कार्य
    • क्षौर तथा स्नानका संकल्प
    • शवका संस्कार
  • +
    श्राद्ध-प्रयोग-विधि
    • मलिनषोडशी
    • अशौचमें दाहकर्ता एवं सपिण्डोंके लिये पालनीय नियम*
    • मृत व्यक्तिके हितार्थ कृत्य
    • दशाहकृत्य
    • दशगात्र-पिण्डदानकी विधि
  • +
    एकादशाहके कृत्य
    • एकादशाह-कृत्योंकी सामग्री*
    • नारायणबलि
    • नारायणबलि-श्राद्धप्रयोग
    • मध्यमषोडशी१
    • प्रेतशय्यादान
    • विविध दान
    • वृषोत्सर्गकी महिमा
    • वृषोत्सर्ग-प्रयोगविधि
    • संक्षिप्त वैतरणी-गोदान
    • उत्तमषोडशी
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    द्वादशाहके कृत्य
    • द्वादशाहके कृत्योंकी सामग्री-सूची
    • सपिण्डीकरणश्राद्ध
    • सपिण्डीकरणश्राद्धके बादके शय्यादानादि कृत्य
  • +
    विविध श्राद्ध
    • उत्तमषोडशीकी आवृत्ति
    • अपकर्षण करनेकी प्रक्रिया
    • अपकर्ष करके उत्तमषोडशीके श्राद्धोंकी आवृत्तिकी एक ही दिन की जानेवाली प्रक्रिया
    • आनुमासिकसंज्ञक ऊनमासिक (पाक्षिक)-श्राद्ध
    • क्षयाह एकोद्दिष्टश्राद्धके अनन्तर ही पार्वणश्राद्धका विधान
    • सांवत्सरिकैकोद्दिष्टश्राद्ध
    • पार्वणश्राद्ध*
    • पार्वणविधिसे किया जानेवाला पिण्डदानरहित सांकल्पिकश्राद्ध१
    • तीर्थश्राद्ध
  • +
    परिशिष्ट
    • पंचकशान्तिकी सामग्री
    • पंचकशान्ति-प्रयोगविधि
    • ग्रह-स्थापन-पूजन
    • नारायणबलिमें पाठ किये जानेवाले पाँच सूक्त
    • वैतरणी-गोदानकी सामग्री
    • वैतरणी-गोदानकी विधि
    • गोपुच्छोदक-तर्पण
    • कुशकण्डिका-विधान*
    • मण्डपमें एकादशाह-कृत्य
    • नीलवृषश्राद्ध*
    • नीलवृषपुच्छोदकतर्पण
    • प्रजापति रुचि और उनके द्वारा की गयी पितरोंकी उपासना [रुचिस्तव]
    • श्राद्धमें ब्राह्मण-भोजनके समय पाठ किये जानेवाले सूक्त
  • अन्तिम पृष्ठ

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