‘महाभारतमें जीवनको उन्नत बनानेवाले कुछ शिक्षाप्रद प्रसंग’ लेख में मानवमात्रकी सर्वविध उन्नतिके लिये गुरुभक्ति, मातृ-पितृ-भक्ति, ईश्वरभक्ति, पातिव्रत्य, तप, सत्य, न्याय, वर्णाश्रमधर्म एवं तीर्थमहिमा, अतिथियों और गौओंकी सेवा आदिका प्रधान-प्रधान स्थलोंपर उदाहरण प्रस्तुत करते हुए निरूपण किया गया है, अत: वह सभीके लिये परम उपादेय और रोचक है। इसके सिवा, अन्यान्य लेखोंमें धर्म, निष्काम कर्म, भक्ति, प्रेम, ज्ञान, सदाचार, संयम, वैराग्य आदि साधनोंपर भी प्रचुर प्रकाश डाला गया है, जिससे साधकोंको अपने साधनके विघ्नों और दोषोंको हटाकर साधनमें उत्तरोत्तर अग्रसर होनेके लिये बहुत सहायता मिल सकती है। एवं भगवान् और महात्माओंके स्वरूप, प्रभाव और स्वभाव आदिका दिग्दर्शन कराते हुए उनपर अतिशय श्रद्धा-विश्वास करके उनसे परम लाभ उठानेकी प्रेरणा की गयी है, जो कि साधनका एक प्रधान महत्त्वपूर्ण अंग है। सभी पाठकोंसे नम्र निवेदन है कि वे इन लेखोंको मनोयोगपूर्वक पढ़ें और अपनी रुचि, विश्वास और अधिकारके अनुरूप साधनकोचुनकर उसको अनुष्ठानमें लानेकी कृपा करें।