॥ श्रीहरि:॥

gstlogo
हिन्दीarrowdown
अमोघ शिवकवच

हिन्दी/संस्कृत

  ‘अमोघ’ का अर्थ होता है— अचूक, अव्यर्थ और ‘कवच’ का अर्थ-सुरक्षा। जिस प्रकार राजा युद्ध भूमि में जाने से पहले अपने शरीर की रक्षा हेतु लोहे का एक आवरण धारण करते थे, उसी प्रकार हमारे तत्वदर्शी ऋषि-मुनियों ने दैहिक-दैविक तथा भौतिक तापों से सुरक्षित रहने के लिये जिन मन्त्रों की रचना की उन्हें कवच मन्त्र कहा जाता है। 
  सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु ये पंचदेव कहे गये हैं। इनकी पूजा और उपासना सभी कार्यों में करनी चाहिये। 
आदित्यं गणनाथं च देवीं रुद्रं च केशवम्। 
पंञ्चदैवत्यमित्युक्तं सर्वकर्मसु पूजयेत॥
(मत्स्यपुराण)
  वेदों में शिव का नाम ‘रुद्र’ रूप में आया है। भगवान् रुद्र वैदिक वाङ्‍मय में एक शक्तिशाली देवता माने गये है। ‘रुद्र’ की अर्थ होता है, भयानक। रुद्र संहार के देवता और कल्याणकारी होने से इन्हें ‘शिव’ कहा गया है। 
  अमोघ शिवकवच स्कन्दपुराण में वर्णित है। इस कवच का पाठ करने वाले साधक के शरीरके आसपास एक सुरक्षा का एक ऐसा घेरा बना रहता है, जिससे किसी भी तरह की नकारात्मक शक्तियों का असर नहीं होता है।
  समस्तप्रकार के शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक कष्टों से मुक्ति दिलाने में कवच अपना प्रभाव रखता है। 
  • प्रथम पृष्ठ
  • अमोघ शिवकवच
  • भगवान् रुद्रकी स्तुति (रुद्राष्टकम्)
  • अंतिम पृष्ठ

सम्बंधित ई-पुस्तकें

श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् (नामावली सहित)

श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् (नामावल...

रामरक्षास्तोत्रम्

रामरक्षास्तोत्रम्

आदित्यहृदयस्तोत्रम्

आदित्यहृदयस्तोत्रम्

नित्यस्तुति:

नित्यस्तुति:

गजेन्द्रमोक्ष

गजेन्द्रमोक्ष