॥ श्रीहरि:॥

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अध्यात्मविषयक पत्र

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • १. नाम-जपकी महिमा और क्रियाकी अपेक्षा भावकी प्रधानता
  • २. अनासक्त भावसे घरमें रहकर ही ध्यानसहित जप करनेकी प्रेरणा
  • ३. श्रद्धा-विश्वासपूर्वक भगवान‍्की शरण और प्रार्थनासे मनकी स्थिरता
  • ४. ईश्वर, प्रकृति, कर्म, कर्मफल आयु आदिके विषयमें विचार
  • ५. आर्तके लिये आश्वासन और देवोपासना
  • ६. एकान्तवास, सत्संग, स्वाध्याय, विवेक-वैराग्य और ईश्वरकी शरणागति
  • ७. परमात्माको प्राप्त पुरुष धर्मात्मा, विरक्त, ज्ञानी, विज्ञानी और अनन्यभक्तविषयक निर्णय
  • ८. भगवान‍्की सकाम उपासनाकी अपेक्षा निष्काम उपासनाकी उत्तमता
  • ९. ‘सोऽहम्’ की उपासना
  • १०. श्रीरामकी और ‘राम’ नामकी उपासना
  • ११. मुक्ति, सांख्यशास्त्र और वेदान्तका रहस्य
  • १२. कर्मयोग तथा भक्ति और ज्ञानका रहस्य
  • १३. गीता और विश्वरूपका रहस्य
  • १४. सकामकी अपेक्षा निष्काम भक्तिकी महिमा और अभिमानसे बचनेके लिये प्रेरणा
  • १५. अहिंसा तथा भगवान‍्की विभूति और उनके समर्पणविषयक सात प्रश्नोंके उत्तर
  • १६. अपने इष्टदेवके मन्त्रकी उपासना तथा देवी-देवताओं और अवतारवादको माननेके लिये प्रेरणा
  • १७. भगवान‍्के दर्शनका उपाय तथा विश्वास, प्रेम, नाम-जप और अर्थभावसहित रामायण-पाठ करनेका विषय
  • १८. भगवत्कृपाकी महिमा, भोगासक्तिका त्याग और सत्संगमें रुचि
  • १९. कुसंगकी उपेक्षा, सत्संग और नित्यकर्मकी महत्ता तथा नित्य-निरन्तर भजन-ध्यान करते हुए सांसारिक कर्म करनेकी प्रेरणा
  • २०. शिवके उपासक राम और रामके उपासक शिव
  • २१. समाधि और व्यापारविषयक प्रश्नोंके उत्तर
  • २२. मनुष्यकी कर्म करनेमें स्वतन्त्रता और फलभोगमें परतन्त्रता
  • २३. आततायी, आत्मा और ज्ञानविषयक प्रश्नोंके उत्तर
  • २४. स्वप्नकी घटनासे चिन्ता और श्रीहनुमान‍्जीसे अनिष्ट होनेकी आशंकाका निषेध
  • २५. निष्कामभावसे सात्त्विक कर्म करनेवालोंका प्रसंग
  • २६. सत्संग, साधन, स्वाध्याय, विद्याध्ययन, जीविका और ब्रह्मचर्यपालनपर विचार
  • २७. कर्मके पाँच भेद
  • २८. भगवत्प्रेम और निर्भरता
  • २९. भगवान‍्की शरणागति
  • ३०. भक्तिप्रधान कर्मयोग
  • ३१. यज्ञोपवीतकी व्याख्या
  • ३२. व्याख्यानदाताके कर्तव्य और भगवान‍्की पतितपावनता
  • ३३. वेदमें मूर्तिपूजा
  • ३४. कर्मयोगके साधनका रहस्य
  • ३५. बिल्वपत्र तोड़ने और चढ़ानेकी विधि
  • ३६. आचार्योंके सिद्धान्त, साधन, दर्शन-शास्त्र तथा ज्ञान और मुक्तिका रहस्य
  • ३७. भक्तिविषयक आठ विभिन्न प्रश्नोंके उत्तर
  • ३८. व्यवसायमें झूठ-कपटके सर्वथा त्यागसे कल्याण
  • ३९. साधनविषयक उपयोगी बातें
  • ४०. जीव, आत्मा और परमात्माका तत्त्व
  • ४१. श्रीहनुमान‍्जी और रावणके विषयमें निर्णय
  • ४२. नाना प्रकारके धार्मिक प्रश्नोंके उत्तर
  • ४३. मनुष्य-जीवनका महत्त्व और कर्तव्य
  • ४४. ईश्वर-प्राप्तिमें श्रद्धा, प्रेम और उत्कट इच्छाकी आवश्यकता
  • ४५. अध्यात्मविषयक तेरह प्रश्नोंके उत्तर
  • ४६. उपासना-सम्बन्धी इक्कीस प्रश्नोंके उत्तर
  • ४७. बनावटी संतोंसे सावधान रहनेकी प्रेरणा
  • ४८. विश्वरूप, उत्तरायण और आत्महत्याके विषयमें शंका-समाधान
  • ४९. श्रीविष्णु, श्रीराम, श्रीकृष्णके नाम-रूपकी एकता
  • ५०. ईश्वर अजन्मा और अविनाशी है
  • ५१. नाम-जप आदिके विषयमें पाँच प्रश्नोंके उत्तर
  • ५२. ईश्वरकी सत्ता और महत्ता आदिके विषयमें पंद्रह प्रश्नोंके उत्तर
  • ५३. सद‍्गुण और कर्मका तथा ईश्वरपर निर्भरताका रहस्य
  • ५४. ईश्वर-भक्ति, लोकसेवा तथा कर्म और उसके फलका रहस्य
  • अंतिम पृष्ठ

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