॥ श्रीहरि:॥

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आशा की नयी किरणें

डॉ. रामचरण महेंद्र

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • शक्तिका केन्द्र आपमें है
  • अपने-आपको हीन समझना एक भयंकर भूल
  • दुर्बलता एक पाप है
  • आप और आपका संसार
  • अपने वास्तविक स्वरूपको समझिये
  • तुम अकेले हो, पर शक्तिहीन नहीं!
  • कथनी और करनी
  • शक्तिका ह्रास क्यों होता है?
  • उन्नतिमें बाधक कौन?
  • अभावोंकी अद्‍भुत प्रतिक्रिया
  • शक्तियोंका दुरुपयोग मत कीजिये
  • महानताके बीज
  • उठो, पुरुषार्थ करो!
  • पुरुषार्थ कीजिये !
  • आलस्य न करना ही अमृत पद है
  • विषम परिस्थितियोंमें भी आगे बढ़िये
  • प्रतिकूलतासे घबराइये नहीं!
  • दूसरोंका सहारा एक मृगतृष्णा
  • मनकी दुर्बलता—कारण और निवारण
  • गुप्त शक्तियोंको विकसित करनेके साधन
  • स्वाध्यायमें सहायक हमारी ग्राहक-शक्ति
  • आपकी अद्‍भुत स्मरणशक्ति
  • लक्ष्मीजी आती हैं
  • ‘किंतु’ और ‘परंतु’
  • आपके वशकी बात
  • जीवन-पराग
  • मध्य मार्ग ही श्रेष्ठतम है
  • सौन्दर्यकी शक्ति प्राप्त करें
  • आत्मग्लानि और उसे दूर करनेके उपाय
  • जीवनकी कला
  • समृद्धि अथवा निर्धनताका मूल केन्द्र—हमारी आदतें !
  • स्वभाव कैसे बदले?
  • शक्तियोंको खोलनेका मार्ग
  • बहम, शंका, संदेह
  • संशय करनेवालेको सुख प्राप्त नहीं हो सकता!
  • मानव-जीवन कर्मक्षेत्र ही है
  • सक्रिय जीवन व्यतीत कीजिये
  • अक्षय यौवनका आनन्द लीजिये
  • चलते रहो!
  • व्यस्त रहा कीजिये
  • मानसिक संतुलन धारण कीजिये
  • प्रतिस्पर्धाकी भावनासे हानि
  • जीवनकी भूलें
  • अपने-आपका स्वामी बनकर रहिये!
  • ईश्वरीय शक्तिकी जड़ आपके अंदर है
  • शक्ति, सामर्थ्य और सफलता
  • अमूल्य वचन
  • अन्तिम पृष्ठ

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