॥ श्रीहरि:॥

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आदर्श देवियाँ

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

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    श्रीसीताके चरित्रसे आदर्श शिक्षा
    • नैहरमें प्रेम-व्यवहार
    • माता-पिताका आज्ञा-पालन
    • पति-सेवाके लिये प्रेमाग्रह
    • पति-सेवामें सुख
    • सास-सेवा
    • सहिष्णुता
    • निरभिमानता
    • गुरुजन-सेवा और मर्यादा
    • निर्भयता
    • धर्मके लिये प्राण-त्यागकी तैयारी
    • सावधानी
    • दाम्पत्य-प्रेम
    • पर-पुरुषसे परहेज
    • वियोगमें व्याकुलता
    • अग्नि-परीक्षा
    • गृहस्थ-धर्म
    • समान व्यवहार
    • सीता-परित्याग
    • पाताल-प्रवेश
    • सीता-परित्यागके हेतु
    • उपसंहार
  • देवी कुन्ती
  • देवी द्रौपदी
  • पतिभक्ता गान्धारी
  • अन्तिम पृष्ठ

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